मानसून (Monsoon) in Rajasthan

राजस्थान सामान्य अध्ययन:नोट्स एवं अभ्यास 1000+प्रश्नोत्तर

General Studies of Rajasthan-All in One

मानसून शब्द की उत्पति अरबी भाषा के मौसिन शब्द से हुई है। जिसका शाब्दिक अर्थ ऋतु विशेष में हवाओं की दिशाएं होता है।

गीष्मकालीन/दक्षिणी पश्चिमी मानसून

गर्मियों में जब उत्तरी गोलार्द्ध में सूय्र की किरणें सीधी पड़ती है। तो यहां निम्न वायुदाब क्षेत्र बनता है। जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में सुर्य की किरणें तीरछी पड़ने के कारण शीत ऋतु होती है और वायुदाब उच्च रहता है। इसलिए हवाऐं दक्षिणी गोलार्द्ध से उत्तरी गोलार्द्ध की ओर चलती है।

भारत की स्थिति प्रायद्वीपीय होने के कारण दक्षिण पश्चिम से आने वाली यह मानसूनी पवनें दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है।

1. अरब सागरीय शाखा

2. बंगाल की खाड़ी शाखा

भारत में सर्वप्रथम मानसून की अरब सागरीय शाखा सक्रिय होती है। औसतन 1 जुन को मालाबार तट केरल पर ग्रीष्म कालीन मानसून की अरब सागरीय शाखा सक्रिय होती है।

नोट (Notes)

भारत में ग्रीष्म कालीन मानसून सर्वप्रथम अण्डमान निकोबार द्वीपसमुह(ग्रेट निकोबार, इंदिरा प्वांइट) पर सक्रिय होता है।

राजस्थान में सर्वप्रथम ग्रीष्मकालीन मानसून की अरब सागरीय शाखा ही सक्रिय होती है।

भारत एवम् राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा ग्रीष्मकालीन मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है।

शीतकालीन मानसून से कोरोमण्डल तट तमिलनाडू में हि वर्षा होती है। शीतकालीन मानसून से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला देश – चीन।

तथ्य(Important Facts)

विश्व का सबसे गर्म स्थान – अल-अजीजिया(लिबिया) सहारा मरूस्थल

भारत का सबसे गर्म राज्य – राजस्थान

भारत का सबसे गर्म स्थान – फलौदी(जोधपुर)

राजस्थान का सबसे गर्म जिला – चुरू

राजस्थान का सबसे गर्म स्थान – फलौदी(जोधपुर)

विश्व का सबसे ठण्डा स्थान – बखोयांस(रूस)

भारत का सबसे ठण्डा राज्य – जम्मू-कश्मीर

भारता का सबसे ठण्डा स्थान – लोह(-46)

राजस्थान का सबसे ठण्डा जिला – चुरू

राजस्थान का सबसे ठण्डा स्थान – माउण्ट आबू(सिरोही)

विश्व का सबसे आर्द्र स्थान – मौसिनराम(मेघालय) भारत

भारत का सबसे आर्द्र राज्य – केरल

भारत का सबसे आर्द्र स्थान – मौसिनराम(मेघालय)

राजस्थान का सबसे आर्द्र जिला – झालावाड़

राजस्थान का सबसे आर्द्र स्थान – माउण्ट आबु

विश्व का सबसे वर्षा वाला स्थान – मोसिनराम(मेघालय)

भारत का सबसे वर्षा वाला स्थान – मोसिनराम(मेघालय)

भारत का सबसे वर्षा वाला राज्य – केरल

राजस्थान का सबसे वर्षा वाल स्थान – माउण्ट आबू

राजस्थान का सबसे वर्षा वाला जिला – झालावाड़

विश्व का सबसे शुष्क स्थान – वखौयांस

भारत का सबसे शुष्क राज्य – राजस्थान

भारत का सबसे शुष्क स्थान – लेह(जम्मु-कश्मीर)

राजस्थान का सबसे शुष्क जिला – जैसलमेर

राजस्थान का सबसे शुष्क स्थान – सम(जैसलमेर) और फलौद(जोधपुर)

विश्व में सबसे कम वर्षा वाला स्थान – बखौयांस

भारत में सबसे कम वर्षा वाला राज्य – पंजाब

भारत में सबसे कम वर्षा वाला स्थान – लेह

राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला जिला – जैसलमेर

राजस्थान में सबसे कम वर्षा वाला स्थान – सम(जैसलमेर)

भारत का सर्वाधिक तापान्तर वाला राज्य – राजस्थान

राजस्थान का सर्वाधिक तापान्तर वाला जिला(वार्षिक) – चुरू

राजस्थान का सर्वाधिक तापान्तर वाला जिला(दैनिक) – जैसलमेर

राजस्थान का वनस्पति रहित क्षेत्र – सम(जैसलमेर)

साइबेरिया ठण्डी हवा एवं हिमालय हिमपात के कारण राजस्थान में जो शीत लहर चलती है वह कहलाती है – जाड़ा

गर्मीयों में थार के मरूस्थल में चलने वाली गर्म पवनें – लू

राजस्थान में सर्वाधिक धुल भरी आधियां चलती है – गंगानर में

राजस्थान में पाला – दक्षिणी तथा दक्षिणी पूर्वी भागों में अधिक ठण्ड के कारण पाला पड़ता है।

दक्षिण राजस्थान में तेज हवाओं के साथ जो मुसलाधार वर्षा होती है – चक्रवाती वर्षा

राजस्थान में मानसून का प्रवेश द्वार – झालावाड़ और बांसवाड़ा

राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा की विषमता वाला जिला – बाड़मेर और जैसलमेर

राजस्थान में वर्षा की सबसे कम विषमता वाला जिला -बांसवाड़ा

21 जून को राजस्थान के किस जिले में सूर्य की किरणे सीधी पड़ती है

22 दिसम्बर को राजस्थान के किस जिले को सुर्य की किरणें तीरछी पड़ती है – श्री गंगानगर

राजस्थान की जलवायु है – उपोष्ण कटिबंधीय

मावठ (Mavath)

सर्दीयों में पश्चिमी विक्षोभ/भुमध्य सागरिय विक्षोप के कारण भारत में उतरी मैदानी क्षेत्र में जो वर्षा होती है उसे मावठ कहते हैं।

मावठ का प्रमुख कारण – जेटस्ट्रीम

जेटस्ट्रीम – सम्पूर्ण पृथ्वी पर पश्चिम से पूर्व कि ओर क्षोभमण्डल में चलने वाली पवनें।

मावठ रबी की फसल के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है। इसलिए इसे गोल्डन ड्राप्स या स्वर्णीम बुंदें कहा जाता है।

महत्वपुर्ण तथ्य(Important facts)

नार्वेस्टर – छोटा नागपुर का पठार पर ग्रीष्म काल में चलने वाली पवनें नार्वेस्टर कहलाती है। यह बिहार एवं झारखण्ड राज्य को प्रभावित करती है।

जब नार्वेस्टर पवनें पूर्व की ओर आगे बढ़ कर पश्चिम बंगाल राज्य में पहुंचती है तो इन्हें काल वैशाली कहा जाता है। तथा जब यही पवनें पूर्व की ओर आगे पहुंच कर असम राज्य में पहुंचती है तो यहां 50 सेमी. वर्षा होती है। यह वर्षा चाय की खेती के लिए अत्यंत उपयोगी होती है इसलिए इसे चाय वर्षा या टी. शावर कहा जाता है।

मैंगो शावर – तमिलनाडू, केरल एवम् आन्ध्रप्रदेश राज्यों में मानसुन पूर्व जो वर्षा होती है जिससे यहां की आम की फसलें पकती है वह वर्षा मैंगो शावर कहलाती है।

चैरी ब्लास्म – कर्नाटक राज्य में मानसून पूर्व जो वर्षा होती है जो कि यहां की कहवा की फसल के लिए अत्यधिक उपयोगी होती है चैरी ब्लास्म या फुलों की बौछार कहलाती है।

मानसून की विभंगता – मानसून के द्वारा किसी एक स्थान पर वर्षा हो जाने तथा उसी स्थान पर होने वाली अगली वर्षा के मध्य का समय अनिश्चित होता है उसे ही मानसून की विभंगता कहा जाता है।

मानसून का फटना – दक्षिण भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के दौरान केरल के मालाबार तट पर तेज हवाओं एवम् बिजली की चमक के साथ बादल की तेज गर्जना के साथ जो मानसून की प्रथम मुसलाधार वर्षा होती है उसे मानसून का फटना कहा जाता है।

वृष्टि प्रदेश एवं वृष्टि छाया प्रदेश वृष्टि प्रदेश एवं वृष्टि छाया प्रदेश

अल-नीनो – यह एक मर्ग जल धारा है जो कि दक्षिण अमेरिका महाद्विप के पश्चिम में प्रशान्त महासागर में ग्रीष्मकालीन मानसून के दौरान सक्रिय होती है इससे भारतीय मानसून कमजोर पड़ जाता है। और भारत एवम् पड़ौसी देशों में अल्पवृष्टि एवम् सुखा की स्थिति पैदा हो जाती है।

ला-नीनो – यह एक ठण्डी जल धारा है जो कि आस्टेªलिया यह महाद्वीप के उत्तर-पूर्व में अल-नीनों के विपरित उत्पन्न होती है इससे भारतीय मानसून की शक्ति बढ़ जाती है और भारत तथा पड़ौसी देशों में अतिवृष्टि की स्थिति पैदा हो जाती है।

उपसौर और अपसौर

उपसौर – सुर्य और पृथ्वी की बीच न्युन्तम दुरी(1470 लाख किमी.) की घटना 3 जनवरी को होती है उसे उपसौर कहते हैं।

अपसौर – सुर्य और पृथ्वी के बीच की अधिकतम दुरी(1510 लाख किमी.) की घटना जो 4 जुलाई को होती है उसे अपसौर कहते हैं।

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