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UPSC Prelims 2021 Test Series

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रैपिड एंटीजन टेस्ट

(Rapid antigen test)

सन्दर्भ: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने कंटेनमेंट जोन तथा अस्पताल अथवा क्वॉरेंटाइन सेंटरों

में ‘आरटी-पीसीआर टेस्ट (RT-PCR test) के साथ स्टैंडर्ड क्यू COVID-19 एजी एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट (Standard Q COVID-19 Ag antigen detection test) के उपयोग की सिफारिश की है।

इसका प्रयोग निर्दिष्ट तरीकों से किया जाएगा, तथा केवल दक्षिण कोरियाई कंपनी ‘एस डी बायोसेंसर’ (S D Biosensor) द्वारा निर्मित ‘स्टैंडर्ड क्यू COVID-19 एजी एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट’ किट के उपयोग की अनुमति दी गयी है

एंटीजन (Antigens) क्या होते हैं?

एंटीजन ऐसे बाहरी तत्व होते हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट क्या है?

इस टेस्ट में व्यक्ति की नाक की दोनों तरफ़ से फ्लूइड का फाहे पर सैंपल लिया जाता है। इस सैंपल का परीक्षण करने पर एंटीजन का पता लगता है तथा SARS-CoV-2 वायरस संक्रमण की पहचान की जाती है।

यह टेस्ट को परम्परागत प्रयोगशालाओं से बाहर देखभाल केद्रों पर किया जाता है। इस परीक्षण में परिणाम मात्र 15-30 मिनट के भीतर आ जाता है।

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट, आरटी-पीसीआर टेस्ट से किस प्रकार भिन्न है?

RT-PCR टेस्ट की भांति, रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट भी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी का पता लगाने के बजाय वायरस संक्रमण की जांच के लिए किया जाता है।

दोनों परीक्षणों के मध्य सबसे महत्वपूर्ण अंतर समय का होता है।

RT-PCR टेस्ट में न्यूनतम 2-5 घंटे लगते हैं।

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट में, संक्रमण के पॉजिटिव अथवा निगेटिव होने का पता लगने की अधिकतम अवधि 30 मिनट होती है

रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट के परिणामों की सीमाएँ

  1. ये परीक्षण विशेष रूप से वायरस की पहचान के लिए किया जाते हैं तथा यह मॉलिक्यूलर पीसीआर परीक्षणों (Molecular PCR tests) की तरह संवेदनशील नहीं होते है। इसका अर्थ है कि एंटीजन टेस्ट के पॉजिटिव परिणाम अत्यधिक सटीक होते हैं, परन्तु इन परिणामों के गलत-निगेटिव (False Negatives) होने की संभावना भी अधिक होती है, अतः इन टेस्ट्स से संक्रमण के नकारात्मक परिणाम से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  2. एंटीजन टेस्ट के गलत-निगेटिव (False Negatives) परिणाम के कारण वायरस के संभावित प्रसार को रोकने या उपचार हेतु निर्णय लेने से पहले एंटीजन टेस्ट के निगेटिव परिणामों की पुष्टि के लिए पीसीआर टेस्ट (PCR test) की आवश्यकता होती है।
  3. किसी सैंपल को लेने के बाद इसे एक संग्रह बफर (extraction buffer) में रखा जाता है, जिसमे इसे केवल एक घंटे के लिए स्थिर (stable) किया जा सकता है। अतः एंटीजन टेस्ट्स को चिकित्सीय समायोजन में सैंपल लेने वाली जगह पर किये जाने की आवश्यकता होती है।

वैक्सीन राष्ट्रवाद क्या है?

(Vaccine Nationalism)

सन्दर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका अब तक दो बार इस बात के संकेत दे चुका है कि, वह COVID-19 वैक्सीन की खुराकों के प्राथमिक उपयोग को सुनिश्चित करेगा। भारत और रूस सहित अन्य देशों ने इसी तरह का रवैया अपनाया है। घरेलू बाजारों के इस प्राथमिकता-करण (prioritisation of domestic markets) को वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism) के रूप में जाना जाता है।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

वैक्सीन राष्ट्रवाद में कोई देश किसी वैक्सीन की खुराक को अन्य देशों को उपलब्ध कराने से पहले अपने देश के नागरिकों या निवासियों के लिए सुरक्षित कर लेता है।

इसमें सरकार तथा वैक्सीन निर्माता के मध्य खरीद-पूर्व समझौता किया जाता है।

अतीत में इसका उपयोग

वैक्सीन राष्ट्रवाद नयी अवधारणा नहीं है। वर्ष 2009 में फ़ैली H1N1फ्लू महामारी के आरंभिक चरणों में विश्व के धनी देशों द्वारा H1N1 वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीद-पूर्व समझौते किये गए थे।

  1. उस समय, यह अनुमान लगाया गया था कि, अच्छी परिस्थितियों में, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की अधिकतम दो बिलियन खुराकों का उत्पादन किया जा सकता है।
  2. अमेरिका ने समझौता करके अकेले 600,000 खुराक खरीदने का अधिकार प्राप्त कर लिया। इस वैक्सीन के लिए खरीद-पूर्व समझौता करने वाले सभी देश विकसित अर्थव्यवस्थायें थे।

संबंधित चिंताएँ

  1. वैक्सीन राष्ट्रवाद, किसी बीमारी की वैक्सीन हेतु सभी देशों की समान पहुंच के लिए हानिकारक है।
  1. यह अल्प संसाधनों तथा मोल-भाव की शक्ति न रखने वाले देशों के लिए अधिक नुकसान पहुंचाता है।
  2. यह विश्व के दक्षिणी भागों में आबादी को समय पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य-वस्तुओं की पहुंच से वंचित करता है।
  3. वैक्सीन राष्ट्रवाद, चरमावस्था में, विकासशील देशों की उच्च-जोखिम आबादी के स्थान पर धनी देशों में सामान्य-जोखिम वाली आबादी को वैक्सीन उपलब्ध करता है।

आगे की राह

विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान टीकों के समान वितरण हेतु फ्रेमवर्क तैयार किये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए इन संस्थाओं को आने वाली किसी महामारी से पहले वैश्विक स्तर पर समझौता वार्ताओं का समन्वय करना चाहिए।

समानता के लिए, वैक्सीन की खरीदने की क्षमता तथा वैश्विक आबादी की वैक्सीन तक पहुच, दोनों अपरिहार्य होते है।

आवास वित्त कंपनियां

(Housing Finance Companies)

सन्दर्भ: हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए कड़े मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं।

प्रस्तावित मानदंड

  1. हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) के लिए शुद्ध परिसंपत्तियों का कम से कम 50% ‘अर्हक संपत्ति’ की प्रकृति में होना चाहिए, जिनमें से कम से कम 75% को व्यक्तिगत आवास ऋण के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।
  2. ऐसे HFC जो मानदंड को पूरा नहीं करते हैं, उन्हें NBFC- निवेश और क्रेडिट कंपनियों (NBFC-ICCs) के रूप में माना जाएगा और इसके लिए HFC से NBFC-ICC में पंजीकरण हेतु रूपांतरण प्रमाणपत्र के लिए RBI से संपर्क करना होगा।
  3. वे NBFC-ICCs जो HFC के रूप में बने रहना चाहते हैं, उन्हें अपनी कुल संपत्ति का 75% व्यक्तिगत आवास ऋण प्रदान करने हेतु निर्धारित रोडमैप का पालन करना होगा।
  4. इसके लिए 31 मार्च 2022 तक 60%, 31 मार्च 2023 तक 70% और 31 मार्च 2024 तक 75% का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  5. RBI ने न्यूनतम शुद्ध स्वामित्व फंड (Minimum Net-Owned Fund- NOF) की राशि 10 करोड़ रु. से बढाकर 20 करोड़ रु करने का भी प्रस्ताव किया है।

अर्हक परिसंपत्ति (Qualifying Assets) क्या हैं?

RBI ने ‘अर्हक परिसंपत्तियों’ को किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के लिए ऋण के रूप में परिभाषित किया है, जिसमे सहकारी समितियों, नई आवासीय इकाइयों के निर्माण / खरीद के लिए ऋण, मौजूदा आवास इकाइयों के नवीनीकरण के लिए व्यक्तियों को ऋण, आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए बिल्डरों को ऋण को सम्मिलित किया गया है।

विनियामक निरीक्षण

  1. एक आवास वित्त कंपनी को RBI के नियमों के तहत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Financial Company- NBFC) माना जाता है।
  2. यदि किसी कंपनी की वित्तीय परिसंपत्तियां उसकी कुल परिसंपत्तियों के 50% से अधिक होती है तथा वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय, उसकी सकल आय के 50% से अधिक होती है, तो, उस कंपनी को NBFC के रूप में माना जाता है।
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